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diwali 2020 calendar जानिए Diwali 2020 की तारीख, पूजा विधि व समय, देखें पूरा कैलेंडर

नमस्कार दोस्तों आप सभी स्वागत है हमारे ब्लॉग पर, आप अभी पढ़ रहें है shashiblog.in आज के आर्टिकल में बताएंगे  Diwali 2020 की तारीख, पूजा विधि व समय, देखें पूरा कैलेंडर 


diwali 2020 calendar

Diwali 2020 दीपावली भारत के कई हिस्सों में हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पांच दिवसीय दिवाली त्योहार धनतेरस से शुरू होता है और भाई दूज पर समाप्त होता है। 


महाराष्ट्र में दिवाली का त्योहार भारत के अन्य हिस्सों की तुलना में एक दिन पहले शुरू होता है। गोवत्स द्वादशी से शुरु होता है। मां लक्ष्मी के अलावा यह त्योहार, जो पांच दिनों तक चलता है, अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।

लक्ष्मी पूजन विधि व नियम | Rituals To Worship Goddess Lakshmi

इस पूजन में रोली, मौली, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, धूप, कपूर, अगरबत्ती, गुड़, धनिया, अक्षत, फल-फूल, जौं, गेहुँ, दूर्वा, श्वेतार्क के फूल, चंदन, सिंदूर, दीपक, घृत, पंचामृत, गंगाजल, नारियल, एकाक्षी नारियल, पंचरत्न, यज्ञोपवित, मजीठ, श्वेत वस्त्र, इत्र, फुलेल, पान का पत्ता, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, कुबेर यंत्र, श्री यंत्र, लक्ष्मी व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, मिष्ठान इत्यादि वस्तुओं को पूजन समय रखना चाहिए। Lakshmi puja घर के पूजा स्थल या तिजोरी रखने वाले स्थान पर करना चाहिए, व्यापारियों को अपनी तिजोरी के स्थान पर पूजन करना चाहिए। उस स्थान को गंगा जल से पवित्र करके शुद्ध कर लेना चाहिए।द्वारा व कक्ष में रंगोली को बनाना चाहिए, देवी लक्ष्मी को रंगोली अत्यंत प्रिय है। सांयकल में लक्ष्मी पूजन समय स्नाना यादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्रों को धारण करना चाहिए विनियोग द्वारा पूजन क्रम शुरू करें।



 दिवाली को रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है। लोग इस महावीर के मोक्ष दिवस पर जैन धर्म का जश्न मनाते हैं। इस दिन, लोग अपने घरों के कोनों को साफ करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं। मिठाइयों के उपहार एक दूसरे को वितरित किए जाते हैं। एक दूसरे से मिलते हैं। घर में सुंदर रंगोली बनाई जाती है, दीपक जलाए जाते हैं और आतिशबाजी की जाती है। दिवाली पूजा को लक्ष्मी पूजा, लक्ष्मी गणेश पूजा के रूप में भी जाना जाता है।

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पांच दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार का नाम इस प्रकार

गोवत्स द्वादशी, दूसरा दिन धनतेरस धन्वंतरि त्रयोदशी, तीसरा दिन नरक चतुर्दशी बड़ा दीपावली, तीसरा दिन छोटी दीपावली, गोवर्धन पूजा और पांचवा दिन गुजराती नववर्ष, भाई दूज मनाया जाता है।

दिवाली पूजा केवल घरों में ही नहीं बल्कि कार्यालय
में भी मनाई जाती है।


दिवाली हिंदू व्यापारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। दिवाली पर कलम, लेखनी और नई चेक बुक की भी पूजा की जाती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार लेखनी और दावात की पूजा देवी महाकाली सरस्वती को खुश करने के लिए की जाती है. वहीं बही खाते और अन्य चीजों की पूजा देवी लक्ष्मी को खुश करे के लिए की जाती है. मान्यता है कि ऐसा करने वाले पर माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की कृपा हमेशा बनी रहती है।

Diwali Puja सूर्यास्त के बाद की जाएगा सूर्यास्त के बाद के समय को प्रदोष का काल कहा जाता है। मान्यता है कि जब अमावस्या तिथि प्रदोश के काल में प्रवेश करती है तो वह समय दिवाली पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। दिवाली पूजा के लिए इससे अच्छा मुहूर्त कोई और नहीं होता है। Diwali  के दिन शाम के सभी सभी लोग अपने घर में लक्ष्मी की आराधना करने के बाद घरों को रोशनी से सजाते है। पूजा संपन्न होने पर सभी एक दूसरे को प्रसाद और उहैं। (Gifts) बांटते है साथ ही ईश्वर से जीवन में खुशियों की कामना करते हैं,अंत में पटाखों और विभिन्न खेलों से सभी दिवाली की मस्ती में डूब जाते हैं।

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 (Diwali Puja) दिवाली पुजा तिथि और  मुहूर्त 2019

दिवाली 2020

14 नवम्बर, शनिवार के दिन


लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 17:30:10 से 19:26:01 

प्रदोष काल- 17:26 से 20:08

वृषभ काल-  17:30:10 से 19:26:01 

अमावस्या तिथि आरंभ- दोपहर 14:18 (14नवम्बर)

अमावस्या तिथि समाप्त- प्रात:काल 10:37(15 नवम्बर)

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