Friday, October 22, 2021
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राजस्थानः मां को नहीं मिला मजदूरी का पैसा, 3 साल के मासूम ने गोद में तोड़ा दम,सोती रही गहरी नींद में कांग्रेस की सरकार

कांग्रेस शासित प्रदेश राजस्‍थान से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहाँ पर एक महिला को उसके अधिकार के मजदूरी नहीं मिली है। जैसा कि मैंने इस लेख के शुरूआत ये शब्द प्रयोग किया कि कांग्रेस शासित प्रदेश ऐसा मैंने इसलिए लिखा है। क्योंकि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अपने भाषणो में हमेशा ही ये जिक्र करते है कि उनकी पार्टी किसान मजदुरो की पार्टी है।

मासूम ने मां की गोद में तोड़ा दम

जानिए राजस्‍थान के भीलवाड़ा के संपुर्ण घटना

आशा नाम के एक महिला को अपनी मजदुरी के पैसे नहीं मिले। वास्तविकता हुआ ये है कि पाली जिले के जोजावर से आशा रावत अपने तीन साल के बीमार बेटे को लेकर भीलवाड़ा जिले के बदनौर कस्बे आई थी। आशा गुजरात के जाम नगर में कुआं खोदने वाले ठेकेदार भंवर सिंह के पास मजदूरी करती थी।भंवर सिंह बदनौर के पास मोगर गांव का रहने वाला है। आशा के बेटे की तबीयत अधिक खराब हो गया है। तो उसने ठेकेदार भंवर सिंह को फोन कर बकाया रुपये वापस देने की मांग की,आरोप है कि ठेकेदार भंवर ने उससे बेटे को लेकर बिदनौर आने को कहा।

ऐसा कहा जा है कि आशा ठेकेदार भंवर सिंह के आश्वासन पर किसी से तीन सौ रुपये कर्ज लेकर अपने बीमार बेटे को लेकर बिदनौर आ गई। पैसे के कमी के कारण वह अकेले आई और पति गोम सिंह रावत मजबूरन नहीं आ पाए क्योंकि उनके पास महज तीन सौ रुपये ही थे , जो एक आदमी का ही किराया था। आशा को उम्मीद थी कि ठेकेदार भंवर सिंह से उसको अपनी बकाया मजदूरी देंगा। और वो अपने बीमार बेटे को अच्छे डाक्टर को दिखा दवा लेकर वापस अपने गांव लौट आएगी लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने रुपये नहीं दिए।

गहरी नींद सो रही राजस्थान सरकार

मजबूर मां को बीमार बेटे को सीने से लगाए ठेकेदार को बार-बार फोन करनी पड़ी।आरोप के अनुसार ठेकेदार रुपये लेकर जल्द पहुंचने की बात कहता रहा। लेकिन बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही और मजबूर मां ठेकेदार की राह निहारती रही। ठेकेदार तो नहीं पहुंचा।लेकिन जिस बेटे को उपचार के बाद दवा लेकर घर आने की सोचकर मां घर लोटने के सोच रही है। वही मासूम ने उस मां की गोद में दम तोड़ दिया। मजबूर मां के पास वापसी के लिए किराए के पैसे भी नहीं बचे थे। कि वो वापस अपने घर जा सके, बच्चों को गोद में लिए मां बिलखती रही। लेकिन कांग्रेस पार्टी नेता और उनके मुख्यमंत्री गहरी नींद में सोते रहे।

जब ग्रामीणो ने महिला का दर्द जाना

जब ग्रामीणो ने महिला का दर्द जाना तब पुलिस को भी जानकारी दी।लेकिन मौके पर आना पुलिस ने जरूरी नहीं समझा, जनाब आएगे भी कैसे , वो थोड़े किसी मंत्री या अफसर के बच्चा था। वो गरीब परिवार मजदूर के बच्चा था। मिडिया रिपोर्ट को माने तो उल्टा थाना प्रभारी विनोद मीणा ने ग्रामीणों से कह दिया कि ये काम पुलिस का नहीं है। हम पुछना चाहते है कि पुलिस के काम क्या है?? राजस्थान के मुख्यमंत्री या फिर राहुल गांधी जी बताए गे। बस कुछ पलो के लिए सोचिए कि ये घटना अगर युपी का होता तो देश के राष्ट्रीय मिडिया , so cold सेक्युलर , तथा कथित बुद्धिजीवी पत्रकार इसी तरह से मौन धारण करते, नहीं अभीतक हंगामा मच चुका होता। खैर मिडिया रिपोर्ट के माने तो गांव वालो ने चंदा एकत्रित कर महिला को गांव वापस बुला दिया। उसके बाद बदनौर गांव के गोविंद पुरी, इदरिश, भागचंद सोनी, सुखदेव माली, इस्लाम मोहम्मद ने गांव के लोगों से चंदे से तीन हजार रुपये का इंतजाम किया और एक वाहन से महिला और उसके बच्चे का शव उसके गांव पाली जिले के जोजावर भिजवाने की व्यवस्था किया।

राजस्थान पुलिस पर और राजस्थान सरकार प्रश्न चिन्ह खड़ा

सबसे बड़ा सवाल राजस्थान के पुलिस और राजस्थान के सरकार पर उठ रहा है। जो घटना पर अबतक कोई भी एक्शन नहीं लिया है। हम सीधे तौर कह रहे है कि क्योंकि नहीं उस ठेकेदार पर हत्या धारा में केस दर्ज किया जाए। अगर ठेकेदार ने महिला की मजबुरी दे दिया होता , आज उसका बेटा जीवित होता। सवाल ये भी है कि क्योंकि ना थाना प्रभारी विनोद मीणा पर भी हत्या के केस दर्ज हो , जिन्होने ग्रामीणो के जानकारी देने के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया है। सवाल राहुल गांधी से भी जो किसान मजदूर के बात करते है। उनके ही सरकार वाले राज्य में एक मजदूर उसके अधिकार के पैसे नहीं मिले। तो क्या राहुल गांधी के लिए किसान मजदूर केवल भाषण तक के लिए है।

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