प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद पर ऐसी क्या गुजरी कि हर कोई रोने लगा.. जाने के लिए पुरा पढ़े••••

 indian idol show के हाल के  episode  में प्रसिद्ध गीतकार (Famous lyricist)संतोष आनंद (Santosh Anand) पहुंचे। उन्होंने show  में अपनी दर्द भरी बातें सुनाकर सभी को इमोशनल कर दिया। संतोष आनंद (Santosh Anand) के सुप्रसिद्ध गीत एक प्यार का नगमा है। गाने को लिखा है। जिसे आज भी लोग सुनना बहुत ही अधिक पसंद करते है। परंतु पिछले कई सालों से गरीबी के हालात में गुजर बसर कर  रहे हैं। वह चल-फिर भी नहीं पाते हैं। जब शो में उन्होंने अपनी हालत के बारे में बताया तो सभी आंखें नम हो गईं। indian idol show (इंडियन आइडल शो) में संतोष ने कहा कि बरसों बाद मैं मुंबई आया हूं। अच्छा लग रहा है। एक उड़ते हुए पंक्षी की तरह मैं यहां आता था और चला जाता था। रात-रात भर जग के मैंने गीत लिखे।

santosh anand untold story& biography

मैंने गीत नहीं अपने खून और कलम से लिखा है यह सबकुछ। इतना अच्छा लगता है वो दिन याद करके। कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे दिन भी रात हो गया है। मैं जीना चाहता हूं बहुत अच्छी तरह। पैदल जाते थे देवी यात्राओं पर, गर्मी में पीले कपड़े पहनकर। राम जी ने मुझपर कृपा भी बहुत की थी। बहुत कुछ दिया भी था। सबकुछ कैसे कैसे चला गया। राम जी का कपाट किसने बंद कर दिए, मुझे आजतक मालूम नहीं। अब वो दौर तो नहीं, लेकिन एक बार जरूर कहना चाहता हूं, जो बीत गया है वो अब दौर न आएगा, इस दिल में तेरे सिवा कोई और नहीं आएगा। घर फूंक दिया हमने अब राख उठानी है, जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी-मेरी कहानी है।

ये सब सुनते ही नेहा कक्कड़ रोने लगीं और कहा, ‘आपके लिखे जो गीत हैं, उनसे हम सबने प्यार करना सीखा है। विश्व के बारे में जाना है और सर मैं मेरी तरफ से आपको 5 लाख रुपए की भेंट ( giff)देना चाहती हूं। यह सुनकर संतोष आनंद रो पड़ते हैं और कहते हैं। मैंने बड़ा स्वाभिमानी हूं। मैंने आज तक किसी नहीं मांगा कुछ भी। मैं आज भी मेहनत करना चाहता हूँ  दूर-दूर जाकर। नेहा ने जबाव में बोली आप ये समझिए की ये आपकी पोती की तरफ से है। उसके बाद संतोष आनंद बोलते हैं, उसके लिए मैं स्वीकार करूंगा।

कौन हैं संतोष आनंद? 

संतोष का जन्म उत्तर प्रदेश (UP) के बुलंदशहर के सिकंदराबाद में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से लाइब्रेरी साइंस की पढ़ाई की। आरंभ  में संतोष ने दिल्ली में बतौर लाइब्रेरियन काम किया। उन्हें कविताओं का बड़ा शौक था। वह दिल्ली में होने वाले कवि सम्मेलनों में हिस्सा लेते थे। कविताएं लिखते थे। 1970 में संतोष आनंद को पहली बार फिल्म के लिए गाने लिखने का ऑफर(offer) मिला। फिल्म पूरब और पश्चिम के लिए ‘पुरवा सुहानी आई रे’ गाना लिखा।

इस गाने को इतना पसंद किया गया कि उन्हें और ऑफर मिलने लगे। 1972 में उन्होंने फिल्म शोर के लिए एक प्यार का नगमा है गाना लिखा, जो बहुत पॉप्युलर हुआ। इस गाने को मुकेश और लता मंगेशकर ने गाया था। साल 1974 में फिल्म रोटी कपड़ा और मकान फिल्म के ‘मैं ना भूलूंगा…’और 1983 में ‘प्रेम रोग’ फिल्म के ‘मोहब्बत है क्या चीज’ गाने के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। साल 2016 में यश भारती अवॉर्ड से नवाजे गए।

बेटे और बहू की मौत के बाद टूट गए थे संतोष आनंद

संतोष आनंद के जीवन का समय बुरा समय साल 2014 में आया , जब  संतोष के बेटे संकल्प और बहू ने आत्महत्या कर ली थी। संकल्प, गृह मंत्रालय में आईएएस अधिकारियों को सोशियोलॉजी और क्रिमिनोलॉजी पढ़ाते थे। लेकिन एक समय ऐसा आया है कि वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। संकल्प और उनकी पत्नी ने कोसीकलां कस्बे के पास रेलवे ट्रैक पहुंचकर ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जान दे दी थी।  कहते है कि इस घटना ने संतोष आनंद (Santosh Anand) को पूरी तरह से तोड़ दिया. जिसके बाद उन्होंने लोगों से दूरी बनाकर अकेले रहना शुरू कर दिया। संतोष के लिए इस सदमे से निकल पाना बहुत कठिन रहा। 

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